प्रशासक (नुज़मा)
हज़रत मोलाना मुहम्मद सईदी (रह.)
सन 1389 हिजरी में आपकी पैदाइश हुई। आपका तारीखी नाम 'फरहत असर' है, लेकिन आप 'मोहम्मद' नाम से मशहूर हुए।
प्रारंभिक शिक्षा घर के माहौल में हुई और क़ुरआन करीम का हिफ़्ज़ (याद करना) मदरसा मज़ाहिर उलूम (वक़्फ़) के मक्तब-ए-खुसूसी में किया।
हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन के बाद आपने अरबी की शुरूआती किताबें विभिन्न उस्तादों से पढ़ीं, जिनमें ज़्यादातर अपने वालिद बुज़ुर्गवार हज़रत मौलाना अतहर हुसैन रहमतुल्लाह अलैह से पढ़ीं।
आपके वालिद साहब ने आपकी तालीम को प्रचलित निसाब से अलग रखते हुए अपने बनाए हुए निसाब के अनुसार दी, जिसकी शुरुआत नदवतुल उलमा के निसाब में मौजूद कुछ किताबों से की।
उन्होंने ना सिर्फ़ थोड़े वक़्त में आपको तालीमी सफ़र में आगे बढ़ाया, बल्कि आपकी इस्तेदाद (क्षमता) बनाने पर भी ख़ास तवज्जो दी। यही वजह है कि आपको अरबी अदब से ख़ास लगाव है।
10 शव्वाल 1406 हिजरी / 18 जून 1986 ईस्वी को आपने मुख्तसरुल मआनी, हिदायाह अव्वलेन, मक़ामात-ए-हरीरी और नूरुल-अनवार का इम्तिहान दिया और फिर से उसी जमाअत (कक्षा) में दाख़िल होकर यह सारी किताबें 'सबआ मुअल्लक़ा' के साथ पढ़ीं।
सन् 1408 हिजरी /1988 ईस्वी में आपने जलालैन, हिदायाह सालिस, मिश्कात शरीफ़, मुकद्दिमा-ए-मिश्कात, और शरह नुखबतुल-फिक्र पढ़ीं और सालाना इम्तिहान में कामयाबी हासिल की।
सन 1409 हिजरी / 1989 ईस्वी में आपने दारस-ए-हदीस (दौर-ए-हदीस) की तालीम मुकम्मल की और बेहतरीन नंबरों से कामयाबी हासिल की।
आपने बुख़ारी शरीफ़ की पहली जिल्द का कुछ हिस्सा (बाबु ‘इजा रकआ दूनास्सफ्फी” तक) हज़रत मौलाना मोहम्मद यूनुस साहब रहमतुल्लाह अलैह से पढ़ा, और पहली जिल्द का बाक़ी हिस्सा हज़रत मुफ़्ती मुज़फ़्फ़र हुसैन रहमतुल्लाह अलैह से।
बुख़ारी शरीफ़ की दूसरी जिल्द हज़रत मौलाना अल्लामा रफ़ीक़ अहमद भेंसावनी रहमतुल्लाह अलैह से पढ़ी।
मुस्लिम शरीफ़ का कुछ हिस्सा (मुकम्मल किताबुस-सलात) मौलाना मोहम्मद यूनुस साहब रहमतुल्लाह अलैह से और बाक़ी हिस्सा, मुस्लिम शरीफ़ की दूसरी जिल्द समेत,तिरमिज़ी शरीफ़ (शमाइल के साथ), इब्ने माजा, मुअत्ता इमाम मालिक रह., मुअत्ता इमाम मुहम्मद रह. और तहावी शरीफ़ – यह सब फ़क़ीहुल-इस्लाम हज़रत मुफ़्ती मुज़फ़्फ़र हुसैन रहमतुल्लाह अलैह से पढ़ा।
अबू दाऊद शरीफ़ और नसाई शरीफ़ का कुछ हिस्सा मौलाना मोहम्मद आक़िल साहब मदज़िल्लहु से और दोनों किताबों का बाकी हिस्सा फ़क़ीहुल-इस्लाम हज़रत मुफ़्ती मुज़फ़्फ़र हुसैन रहमतुल्लाह अलैह से पढ़ा।
1409 हिजरी/1989 ईस्वी के सालाना इम्तिहान (वार्षिक परीक्षा) में आपने पूरी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। आप को महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित किताबों के साथ-साथ मदरसे की ओर से नकद इनाम से भी सम्मानित किया गया। आपने कुल 200 अंकों में से 193 अंक हासिल किए।
आपके दौर-ए-हदीस (हदीस के अंतिम वर्ष) के विशेष साथियों में उल्लेखनीय नाम हैं:
हज़रत मौलाना मुफ्ती अब्दुल हसीब आज़मी (उस्ताद, मज़ाहिर उलूम, सहारनपुर),
मौलाना लईक़ अहमद आज़मी (उस्ताद, बैतुल उलूम, सराय मीर, आज़मगढ़),
मौलाना मोहम्मद ईसा बिजनौरी (इमाम और ख़तीब, जामा मस्जिद व मोहतमिम, जामिआ अशरफुल उलूम, नजीबाबाद),
और मौलाना खलील अहमद दीवा (उस्ताद, फलाह दारेन, तर्केश्वर, गुजरात)।
मज़ाहिर उलूम, सहारनपुर से फ़ारिग़ (स्नातक) होने के बाद आपने दारुल उलूम देवबंद में भी दाख़िला लिया, लेकिन किसी विशेष कारण से पढ़ाई का सिलसिला 'वक़्फ़ दारुल उलूम' में जारी रखा, और वहीं से 1410 हिजरी में दौर-ए-हदीस की तक़मील (पूर्णता) की।
दारुल उलूम देवबंद में आपने हदीस की विभिन्न किताबें निम्नलिखित उस्तादों से पढ़ीं:
हज़रत मौलाना मोहम्मद सालिम साहब क़ासमी रहमतुल्लाह अलैह
हज़रत मौलाना मोहम्मद नईम साहब देवबंदी रहमतुल्लाह अलैह
हज़रत मौलाना खुर्शीद आलम साहब क़ासमी,
हज़रत मौलाना जमी़ल अहमद साहब सकरोडीवी,
और हज़रत मौलाना मोहम्मद इस्लाम साहब क़ासमी
इनमें सबसे पहले उल्लेखित उस्ताद, हज़रत मौलाना मोहम्मद सालेम साहब क़ासमी को सीधे तौर पर हकीमुल उम्मत हज़रत मोलाना अशरफ अली थानवी रहमतुल्लाह अलैह से पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त था।
फ़ारिग़ुत्तेहसील (स्नातक) होने के बाद आप को दारुल उलूम शाह बहलोल, सहारनपुर में शिक्षक नियुक्त किया गया।
यहाँ थोड़े समय तक पढ़ाने के बाद, आप ने मदरसा अब्दुर्रब, दिल्ली में लगभग दो वर्षों तक मक़ामात और मिश्कात जैसी किताबें पढ़ाईं।
विभिन्न विद्वानों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों के लगातार अनुरोध पर, फकीहुल इस्लाम हज़रत मौलाना मुफ्ती मुज़फ्फ़र हुसैन रहमतुल्लाह अलैह ने 1412 हिजरी / 1991 ईस्वी में आपको मज़ाहिरुल उलूम, सहारनपुर में बतौर उस्ताद नियुक्त कर लिया।
आपको प्रारंभिक अरबी कक्षा ( इब्तिदाई अरबी) में पढ़ाने की ज़िम्मेदारी दी गई।
कुछ समय के लिए आपको दारुल इफ्ता में फतवा लेखन की सेवा भी सोंपी गई।
आपकी प्रतिभा और अध्यापन क्षमता को देखते हुए, आपको 1422 हिजरी / 12 अप्रैल 2001 ईस्वी में प्रारंभिक कक्षा से पदोन्नत कर मध्य अरबी कक्षा (दर्जा ए वसती) में स्थानांतरित कर दिया गया।
30 जमादिल-ऊला 1424 हिजरी/ 1 अगस्त 2003 को शूरा की बैठक में शूरा के सदस्यो की सहमति और दबाव पर हज़रत फकीहुल इस्लाम रहमतुल्लाह अलैह ने मुदार्रिसीन और मुलाज़िमीन (शिक्षक एवं कर्मचारियों) की सर्वसम्मति से की गई याचिका को स्वीकार करते हुए आपको (मोलाना मुहम्मद सईदी को) नाइब नाज़िम (उप-प्रबंधक) नियुक्त किया।
उसी वर्ष 28 रमजान 1424 हिजरी को फकीहुल इस्लाम हज़रत मौलाना मुफ्ती मुज़फ्फर हुसैन रहमतुल्लाह अलैह के निधन के बाद, नमाज़े जनाज़ा से कुछ मिनट पहले लाखों लोगों के जमावड़े ने घोषणा की कि आपको मदरसा मज़ाहिर उलूम का नाज़िम और मुतवल्ली (प्रबंधक और अध्यक्ष) नियुक्त किया जाए। इस प्रस्ताव की पुष्टि शूरा के सम्माननीय सदस्यों ने अपनी बैठक में 7 शवाल 1424 हिजरी/ 13 दिसम्बर 2003 को की।
आपको कई विद्वानों और मुहद्दिसीन से हदीस की इजाज़त प्राप्त है। इनमें फकीहुल उम्मत हज़रत मौलाना मुफ्ती महमूद हसन गंगोही रहमतुल्लाह अलैह, फकीहुल इस्लाम हज़रत मौलाना मुफ्ती मुज़फ्फर हुसैन रहमतुल्लाह अलैह, शेखुल हदीस हज़रत मौलाना मोहम्मद युनुस साहब जोनपुरी रहमतुल्लाह अलैह, मोहतरम मौलाना सैयद मोहम्मद आकिल साहब मद्दज़िल्लुहू और जनाब मौलाना सैयद मोहम्मद सलमान साहब सहारनपुरी के अलावा मिर्ज़ा मज़हर जाने जानां के परिवार के प्रसिद्ध और मशहूर बुज़ुर्ग मौलाना मोहम्मद ज़ेद फारूकी देहलवी से भी हदीस की इजाज़त प्राप्त है। उनकी एक उच्चतम सनद सिर्फ बारह वस्तों से अमीरुल मुमिनीन फिल हदीस हज़रत इमाम बुखारी रहमतुल्लाह अलैह से मिल जाती है।
पहले-पहल मुहिय्युस्सुन्नह हज़रत मौलाना शाह अबरारुल हक़ नव्वरल्लाहु मरकदहु से बेअत (समर्पण की शपथ) हुई, फिर फकीहुल इस्लाम हज़रत अक्दस मुफ्ती मुज़फ्फर हुसैन नव्वरल्लाहु मरकदहु ने 1 शाबान 1415 हिजरी को इजाज़त-ए-बेअत प्रदान की। इसी प्रकार आपके वालिदे माजिद हज़रत मौलाना अत्तहर हुसैन रहमतुल्लाह अलैह और हज़रत हाफिज़ ज़फर अहमद सहारनपुरी रहमतुल्लाह अलैह ने भी आपको खलअत-ए-खिलाफ़त (उच्च सम्मान) प्रदान किया था।
1425 हिजरी / 2005 ईस्वी मैं बैतुल्लाह के हज का सोभाग्य भी प्राप्त हुआ।
अल्लाह तआला आपकी उम्र और इल्म में और अधिक बरकत अता फरमाए। आमीन




